logo

कांग्रेस में बड़ा फेरबदल : प्रियंका गांधी भी हटाई गयीं, एक साथ 12 प्रभारियों के बदलने के क्या हैं मायने?

P_GANDHI.jpg

द फॉलोअप डेस्क 

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने पुरानी कार्यकारिणी को भंग करते हुए इसमें नये सदस्यों को शामिल किया है। वहीं, प्रियंका गांधी से यूपी का प्रभार वापस लेने साथ 12 राज्यों के प्रभारी बदल दिये गये हैं। ये सभी पार्टी के महासचिव पद पर भी विराजमान होंगे। चौंकाने वाला तथ्य ये भी है कि सचिन पायलट को भी महासचिव की कुर्सी दी गयी है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अजय माकन को नयी कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष का पद दिया गया है। पियंका गांधी से यूपी का प्रभार वापस ले लिया गया है, लेकिन उनको भी महासचिव बना दिया गया है। यूपी का प्रभार झारखंड के पभारी रह चुके अविनाश पांडेय को सौंपा गया है। 


किसे कहां का प्रभार मिला  

रमेश चेन्निथला को महाराष्ट्र का प्रभारी और मोहन प्रकाश को बिहार के प्रभारी पद की कमान सौंपी गयी है। डॉ.चेल्लाकुमार को तीन राज्यों मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। डॉ अजोय कुमार को ओडिशा की कमान सौंपी गयी है। खबर है कि नयी व्यवस्था होने तक उनके पास तमिलनाडु और पुडुचेरी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी रहेगी। इसी तरह भारत सिंह सोलंकी को जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है। चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश की जिम्मेदारी राजीव शुक्ला को सौंपी गयी है। राजस्थान का प्रभार सुखजिंदर सिंह रंधावा को दिया गया है। पंजाब की कमान देवेंद्र यादव को सौंपी गयी है। वहीं, गोवा, दमन और दीव, दादर और नागर हवेली के प्रभारी पद पर मानिकराव ठाकरे को मनोनीत किया गया है। त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर और नागालैंड का प्रभारी गिरीश छोडंकर को बनाया गया है। आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार के प्रभारी मानिकराम टैगोर बनाये गये हैं। गुरदीप सिंह सप्पल को कार्यकारिणी का प्रशासनिक प्रभार सौंपा गया है। 

झारखंड में कौन सा समीकरण काम कर रहा है 

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में आदिवासी सीटों पर कांग्रेस पार्टी का अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है। इसे देखते हुए झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में भी नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठने लगी थी। प्रभारी और अध्यक्ष की ओर इशारा करके कहा गया कि, एक आदिवासी बहुल राज्य में ये लोग मास अपीलिंग नेता नहीं है। न केवल संगठन बल्कि मंत्रियों को बदलने की मांग भी उठती रही है। कार्यकर्ताओं और विधायकों ने तो मंत्रियों के कामकाज की शिकायत की ही, खुद प्रभारी भी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं। हां, बात दीगर है कि उन्होंने पलटी मार ली थी। बता दें कि गुलाम अहमद मीर को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है।